वन नहीं तो इंसान भी नहीं बचेगा : शिवराज
भोपाल, 23 नवंबर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां सोमवार को दो दिवसीय मुख्य वन संरक्षक सम्मेलन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वनों को बचाना जरूरी है। वन नहीं बचे तो इंसान भी नहीं बचेगा।
मुख्यमंत्री चौहान ने राजधानी भोपाल के प्रशासन अकादमी में सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत में पेड़-पौधों की पूजा की परंपरा रही है। पेड़ों की पूजा इस बात का प्रतीक है कि वनों के बिना जीवन अधूरा है। भारतीय संस्कृति कहती है कि प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि दोहन करें। प्रदेश में वन क्षेत्र लगातार बढ़ा है, इसके पीछे संयुक्त वन प्रबंधन समितियों द्वारा किया गया बेहतर कार्य है।
उन्होंने आगे कहा कि वनों को बचाने के लिए वनों को वनवासियों के रोजगार से जोड़ना होगा। वनोपजों का समर्थन मूल्य घोषित कर इसी दिशा में प्रयास किया गया है। बांस मिशन के जरिए भी रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने वन अफसरों से कहा कि वन संरक्षण के साथ विकास कार्य न रुके, इस पर ध्यान दे। वनवासियों की कठिनाइयों को समझकर योजनाओं को अमल में लाया जाए। वन विभाग व स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर वन ग्रामों में स्वास्थ्य शिविर लगाएं। साथ ही वन प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि वनवासियों का समग्र विकास संयुक्त वन प्रबंधन के माध्यम से किया जा रहा है। वन ग्रामों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वन रक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। वनों के विकास एवं संरक्षण में क्षेत्रीय अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्रमुख सचिव (वन) दीपक खांडेकर ने भरोसा दिलाया कि विभाग राज्य शासन की प्राथमिकता के अनुरूप पर्यावरण और वन संरक्षण का कार्य करेगा।
शुरुआत में प्रधान मुख्य वन संरक्षक नरेंद्र कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में संयुक्त वन प्रबंधन, वन्य प्राणी प्रबंधन, वन संरक्षण और वन क्षेत्रों में आजीविका के साधन बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। अंत में मुख्य वन संरक्षक सी़ एस़ मान ने आभार प्रकट किया।