भोपाल: बात जुलाई 2013 की है। रहटगांव पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने दो साल तक उसकी तलाश की लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। उसके परिवार ने फिर अदालत का रुख किया और आरोप लगाया कि गांव के ही पांच लोगों ने उसकी हत्या कर दी और शव को छिपा दिया।
नई टीम को फिर दी जिम्मेदारी
पिछले साल अक्टूबर में मामले में अनुविभागीय पुलिस अधिकारी टिमरनी आकांक्षा ताल्या को जांच अधिकारी बनाया गया था। रहस्य को सुलझाने में लगभग एक साल की कड़ी जासूसी का काम लगा। ताल्या ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि हालांकि आरोपियों के खिलाफ हत्या और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। पर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि न तो शव मिला और न ही कोई सबूत मिला।
युवक किन्नरों की तरह करता था व्यवहार
ताल्या ने कहा कि हमने 2023 में नए सिरे से जांच शुरू की। हम सबूत तलाशते रहे। इसमें से बहुत कुछ अस्पष्ट था। फिर हमें पहला सुराग मिला कुछ ग्रामीणों ने बताया कि लापता युवक किन्नर की तरह व्यवहार करता था। हमने उसकी तस्वीरें लीं और हरदा तथा आस-पास के जिलों में किन्नरों के विभिन्न ठिकानों पर जाना शुरू किया।
दिल्ली में घर घर जाकर ली तलाशी
इस मामूली सुराग के आधार पर पुलिस ने कई बार तलाश की। दिल्ली में घर-घर जाकर की गई तलाश के बाद किन्नर मिल गया। इस मामूली सुराग के आधार पर पुलिस ने कई बार तलाश की। कई बार असफल प्रयासों के बाद हमें एक और जानकारी मिली। हरदा का एक किन्नर कई सालों से दिल्ली में रह रहा था। हमें पक्का संदेह था कि यह लापता युवक हो सकता है। हमें दिल्ली के इलाके का मोटा-मोटा अंदाजा था और हमारी टीमें शुक्रवार को करीब 8 घंटे तक तस्वीरों के साथ घर-घर गईं, तब जाकर आखिरकार उसे ढूंढ़ निकाला।
अंगूरी के नाम से रह रहा था युवक
वह वहां अंगूरी बाई के नाम से रह रहा था। हरदा आने में आनाकानी कर रहा था। हमने बताया कि 11 साल से उसकी तलाश की जा रही है और जांच चल रही है। वह सहमत हो गया, लेकिन इस शर्त पर कि उसे दिल्ली लौटने की अनुमति दी जाएगी। वह जिस तरह से रह रहा है, वैसे ही रहना चाहता है। हमारी टीमें उसे शनिवार को हरदा ले आईं। हमने उसे उसके परिवार के सदस्यों से मिलवाया। अब उसे रविवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
