नई दिल्ली: देश में कई बार लोग बैंक की शिकायतों को लेकर सोशल मीडिया पर लिखते रहते हैं। राजस्थान के एक शख्स ने हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के खिलाफ एक्स पर नाराजगी जताते हुए एक पोस्ट लिखा था। इसमें एसबीआई ब्रांच की एक फोटो पोस्ट करने के साथ लिखा था कि दोपहर के 3 बज रहे हैं और पूरा स्टॉफ लंच पर है। शख्स ने एसबीआई को टैग करते हुए लिखा कि सारी दुनिया बदल सकती है, लेकिन आपकी सेवाओं में कोई बदलाव आने वाला नहीं है। हालांकि इस फोटो के सोशल मीडिया पर आते ही एसबीआई भड़क गया और शख्स से तुरंत फोटो को डिलीट करने के लिए कह दिया। इस पोस्ट पर लोगों ने भी मजेदार कमेंट किए हैं। कई लोग पोस्ट पर कमेंट करके एसबीआई के लंच टाइम के बारे में पूछ रहे हैं। इस पोस्ट पर लोग लगातार कमेंट कर रहे हैं। आईए आपको बताते हैं कि पूरा मामला क्या है।

क्या है पूरा मामला
दरअसल राजस्थान के पाली में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक शाखा की फोटो एक शख्स से एक्स पर पोस्ट की थी। इसमें शख्स ने लिखा कि अभी दोपहर के तीन बज रहे हैं और पूरा स्टॉफ लंच पर है। लिखा कि विडंबना यह है कि एक तरफ एसबीआई कहता है कि वह लंच ब्रेक नहीं करते और दूसरी तरफ पूरा स्टॉफ एक साथ लंच पर गया हुआ है। शख्स ने एसबीआई को टैग करते हुए लिखा कि प्रिय एसबीआई, दुनिया पूरी तरह बदल सकती है, लेकिन आपकी सेवाएं नहीं बदल सकतीं।”

एसबीआई ने कही ये बात

ग्राहक को जवाब देते हुए बैंक ने असुविधा के लिए माफ़ी मांगी है, लेकिन बैंक परिसर के अंदर फ़ोटोग्राफ़ी प्रतिबंधित होने का हवाला देते हुए बैंक ने उसे फ़ोटो हटाने के लिए भी कहा है। बैंक ने लिखा कि ‘हमें आपको हुई असुविधा के लिए खेद है। हालांकि, ध्यान दें कि सुरक्षा कारणों से शाखा परिसर के अंदर फ़ोटोग्राफ़ी/वीडियोग्राफ़ी प्रतिबंधित है। अगर इनका दुरुपयोग किया जाता है तो आपको ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसलिए, हम आपको सलाह देते हैं कि आप इन्हें सोशल मीडिया साइट्स से हटा दें।’

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

कस्टमर की पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक यूजर ने लिखा कि अगर आपको एसबीआई की सेवाएं पसंद नहीं है तो शिकायत करने की बजाए आगे बढ़ें। एक अन्य यूजर ने लिखा कि कोई नहीं जानता कि बैंक कर्मचारी कितनी मेहनत करते हैं। कम से कम उन्हें खाना खाने का अधिकार तो होना चाहिए। वहीं एक यूजर ने लिखा कि यह सिर्फ एसबीआई का नहीं सरकारी बैंकों का पुराना मुद्दा है। मुझे किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है।