नई दिल्ली: भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने सैटेलाइट इंटरनेट की रेस में बाजी मार ली है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) और लक्जमबर्ग की कंपनी एसईएस के जॉइंट वेंचर को देश में गीगाबिट फाइबर इंटरनेट प्रदान करने के लिए सैटेलाइट ऑपरेट करने की मंजूरी मिल गई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि स्पेस रेगुलेटर ने इन कंपनियों के जॉइंट वेंचर ऑर्बिट कनेक्ट इंडिया को भारत के आकाश में सैटेलाइट ऑपरेट करने की मंजूरी दे दी है। ऑर्बिट कनेक्ट इंडिया को तीन तरह की मंजूरियां दी गई हैं। कंपनी को ये मंजूरियां ऐसे समय मिली हैं जब जेफ बेजोस की ऐमजॉन डॉट कॉम से लेकर एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी कंपनियां भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए हरी झंडी का इंतजार कर रही हैं।
कौन-कौन हैं रेस में
IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका ने रॉयटर्स को बताया कि एक और कंपनी Inmarsat को भी भारत में सैटेलाइट ऑपरेट करने की मंजूरी मिल गई है। दो अन्य कंपनियों एलन मस्क की स्टारलिंक और ऐमजॉन की Kuiper ने भी इसके लिए आवेदन किया है। यूटेलसैट की भारती एंटरप्राइजेज के निवेश वाली कंपनी वनवेब को पिछले साल के अंत में सभी तरह की मंजूरियां दे दी गई थीं। डेलॉइट के अनुसार भारत का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस मार्केट अगले पांच वर्षों में सालाना 36% की दर से बढ़ने और 2030 तक 1.9 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर स्पेस-बेस्ड इंटरनेट के जरिए ग्रामीण इलाकों को जोड़ने की दौड़ तेज हो रही है। ऐमजॉन के Kuiper ने 10 अरब डॉलर के निवेश करने की योजना बनाई है। इसकी घोषणा 2019 में की गई थी। उसी साल स्पेसएक्स ने अपने पहले ऑपरेशनल स्टारलिंक सैटेलाइट्स को तैनात करना शुरू किया था।
