खरी खरी संवाददाता

मुंबई, 20 जून। महाराष्ट्र में शुक्रवार को शिव सेना का 60वां का स्थापना दिवस समारोह पार्टी के दोनों धड़ों के बीच ज़ुबानी जंग का अखाड़ा बन गया। उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी शिव सेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने के संकेतों के बीच भावुक अपील करते दिखे तो वहीं शिव सेना के प्रमुख एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उनकी पार्टी ही बाला साहेब ठाकरे की पार्टी की असली वारिस है।

उद्धव ठाकरे ने शिव सेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने पार्टी अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़े की पेशकश की।उन्होंने कहा कि अगर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगता है कि पार्टी छोड़कर गए सांसदों की ओर से उन पर लगाए गए आरोप सही हैं तो वो पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने शिव सेना के ‘ऑपरेशन टाइगर’ को गंदी राजनीति क़रार दिया और उन आरोपों का भी खंडन किया कि शिव सेना (यूबीटी) कांग्रेस में विलय करने जा रही है। एकनाथ शिंदे की शिव सेना ने उद्धव ठाकरे की शिव सेना को अपने पाले में लाने कोशिश को कथित तौर पर ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया है। शिव सेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिव सेना में जाने की ख़बरें हैं। पार्टी के संसदीय दल की बैठक में ये छह सांसद नहीं पहुँचे थे।शिव सेना की स्थापना उद्धव ठाकरे के पिता बाला साहेब ठाकरे ने की थी और टाइगर इसका प्रतीक चिह्न है।शिव सेना (यूबीटी) के नौ में से छह सांसदों के बारे में ख़बर है कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर संसद में अलग बिठाने की मांग की है।

शुक्रवार को मुंबई षण्मुखानंद हॉल में शिवसेना के 60 साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ‘पार्टी में टूट’ को लेकर काफ़ी भावुक दिखे।इस कार्यक्रम में नेता, कार्यकर्ता और पार्टी के सिर्फ़ तीन सांसद मौजूद थे।कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने शिव सेना की ओर पार्टी के छह सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके ख़िलाफ़ लगाए जा रहे आरोपों पर विश्वास है तो वो पार्टी प्रमुख नहीं रहेंगे।उन्होंने कहा, “पिछले 12-13 साल से मैं एक नेता के तौर पर आप लोगों की सुन रहा हूँ। लेकिन अगर आपको लगता है कि जो आरोप मुझ पर लगाए जा रहे हैं वो सच है तो मैं पार्टी प्रमुख से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हूँ। लेकिन मेरे लिए एक चीज़ साफ़ है कि सोने की शिव सेना चोरों के हाथों नहीं सौंपी जानी चाहिए। मेरे अंदर नेता की बनने की लालसा नहीं है। मैं इस पद से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हूँ।” उन्होंने कहा, ”पार्टी बदलने वाले सांसद ये आरोप लगा रहे हैं कि मैं उपलब्ध नहीं रहता हूँ और सांसदों को समय नहीं देता। ये सारे आरोप मुझ पर लगाए जा रहे हैं। आप बताइए, क्या आप इन पर विश्वास करते हैं? अगर हाँ, तो मैं इसी वक़्त पद छोड़ने को तैयार हँ। आप में से कोई एक आगे आए, मैं अभी उसे पार्टी सौंपने को तैयार हूँ। आरोप लगाने वालों को जवाब आप दीजिए मैं भागने वालों में नहीं हूँ। मैं मज़बूती से खड़ा रहूंगा, लेकिन मुझे आपका साथ चाहिए।”