खरी खरी खरी संवाददाता
कोलकता, 3 जून। लगातार 15 सालों तक पश्चिम बंगाल की सत्ता में रहने वाली तृणमूल कांग्रेस–टीएमसी सत्ता से बाहर होते ही दो फाड़ हो गई। बागियों के नेता ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष बन गए। ममता बनर्जी की सरपरस्ती वाली पार्टी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर हुई है। पंद्रह साल तक पार्टी की सुप्रीमो और प्रदेश की सीएम रहने वाली ममता बनर्जी का सियासी महल ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।
कभी कांग्रेस से बगावत करते क्षेत्रीय पार्टी तृणमूल कांग्रेस–टीएमसी बनाने वाली ममता बनर्जी ने अपनी पश्चिम बंगाल की सत्ता केंद्र बन गए वामपंथ का किला ढहा दिया। उन्हीं ममता बनर्जी के सत्ता और सियासत के किले को भाजपा ने अथक मेहनत के बाद नेस्तानाबूत कर दिया। पहले ममता की टीएमसी को सत्ता से बाहर किया और अब पार्टी के दो टुकड़े करवा दिए। सत्ता हाथ से निकलते ही सार्वजनिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल और पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। युवा विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने ममता के नेतृत्व और नीतियों पर सवाल खड़े किए तो उन्हें दो दिन पहले पार्टी से बाहर कर दिया गया। लेकिन पार्टी के विधायक बागी हुए ऋतुब्रत के साथ हो गए। उन विधायकों की दम पर दो दिन पहले पार्टी से निकाले गए बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बन गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु ने बागी विधायकों की ओर से सौंपे गए समर्थन पत्र को स्वीकार करते हुए विपक्ष के नेता के लिए आवंटित कक्ष की चाबी ऋतब्रत को सौंप दी।
ऋतब्रत ने पत्रकारों से कहा, “तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले दो-तिहाई विधायक एकजुट हैं। हमें 60 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। दो विधायक फिलहाल राज्य से बाहर हैं। हम सदन में भाजपा का मजबूती से सामना करेंगे।” ऋतब्रत ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से संसदीय दल का सलाहकार बनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी के साथ उनका कोई संबंध नहीं है। इससे पहले दोपहर में 58 बागी विधायकों ने विधानसभा में बैठक की और विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा। पत्र में ऋतब्रत को विधायक दल का नेता चुने जाने की जानकारी दी गई थी। ऋतब्रत ने बताया, “अखरूजम्मां को विधानसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जावेद अहमद खान, सबीना यास्मीन, शिउली साहा और संदीपन साहा को उपनेता चुना गया है।” उन्होंने कहा कि उनका समूह सदन में एक ज़िम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाएगा। इससे पहले पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने दोपहर में पार्टी की सभी समितियों और संगठनों को भंग कर दिया था।
मीडिया से बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का यह दो-तिहाई बहुमत वाला विधायक दल मैं में नहीं, बल्कि हम में विश्वास करता है। जो भी नियम और मानदंड निर्धारित किए गए हैं, हमने उन सभी का पालन किया है और इसी कारण हमें 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्ष के रूप में मान्यता मिली है।” उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ममता बनर्जी हमारी मुख्य सलाहकार हों और हमें ऐसा मार्गदर्शन दें जिससे विपक्ष के रूप में हमारी स्थिति और अधिक मजबूत हो सके। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर 80 सदस्य निर्वाचित हुए थे। उनमें से दो-तिहाई से अधिक सदस्यों ने हमारे दावे का समर्थन किया है और हमारे दावे को स्वीकार कर लिया गया है।”
