मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की तैयारी में जुटा विपक्ष

खरी खरी संवाददाता
नई दिल्ली। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए इंडिया गठबंधन उनके ख़िलाफ़ महाभियोग लाने पर विचार कर रहा है। सोमवार को विपक्षी दलों के सांसदों की बैठक में इस पर चर्चा हुई। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा कि विपक्ष ने चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने की तैयारी शुरू कर दी है।
विपक्षी गठबंधन की ओर से ये तैयारी ऐसे समय शुरू हुई है जब पहले ही लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहे हैं। रविवार को कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार के सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की भी शुरुआत की है। हालांकि, रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर राहुल गांधी के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उनके आरोप बेबुनियाद हैं। रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद सोमवार को विपक्षी दलों के सांसदों की एक बैठक हुई। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू को बताया, “उन्होंने (ज्ञानेश कुमार) मुख्य चुनाव आयुक्त की तरह नहीं बल्कि बीजेपी के नेता की तरह बात की।”
केसी वेणुगोपाल ने कहा, “पूरी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य दलों के उठाए सवालों का जवाब नहीं दिया। बल्कि उन्होंने सवाल उठाने के लिए विपक्ष का ही मखौल उड़ाया। क्या ये सीईसी की ड्यूटी है कि वो राजनीति में शामिल हों?”
केसी वेणुगोपाल ने ये भी कहा कि विपक्ष के पास सीईसी के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त संख्याबल है। साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के क़ानून के प्रावधानों पर भी सवाल किए।
हालांकि, इन सबके बीच ये जानना ज़रूरी हो जाता है कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को नियुक्त करने और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है।
साथ ही ये भी जानते हैं कि सीईसी को लेकर कांग्रेस क्या आरोप लगा रही है और रविवार को अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सीईसी ने क्या कहा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में राहुल गांधी के सवालों का जवाब देते हुए उनके आरोपों को बेबुनियाद करार दिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “इनकी जाँच बिना हलफ़नामा दाख़िल किए नहीं हो सकती है। या तो राहुल गांधी हलफ़नामा दें या फिर देश से माफ़ी माँगें। उन्हें 7 दिनों के अंदर हलफनामा देना होगा या पूरे देश से माफ़ी मांगनी होगी, नहीं तो समझा जाएगा कि ये आरोप (वोटर लिस्ट में गड़बड़ी) बेबुनियाद हैं।”
उन्होंने कहा कि “वोट चोरी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करोड़ों मतदाताओं और लाखों चुनाव कर्मचारियों की ईमानदारी पर हमला है।
महाराष्ट्र को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि समय रहते जब ड्राफ़्ट सूची थी, तो आपत्ति दर्ज क्यों नहीं कराई और नतीजों के बाद ही गड़बड़ी की बात क्यों सामने लाई गई।
बिहार पर उन्होंने कहा, “वहां 2003 में भी एसआईआर हुआ था और उसकी तारीख़ थी 14 जुलाई से 14 अगस्त। तब भी सफलतापूर्वक हुआ था और इस बार भी सफलतापूर्वक हुआ है। एसआईआर प्रक्रिया को चोरी या हड़बड़ी में कराने जैसी बातें कहकर भ्रम फैलाया जा रहा है।”
रविवार को चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ़्रेंस से पहले कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार के सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की।इस दौरान राहुल गांधी ने एक बार फिर आरोप लगाया, कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर ‘वोट चोरी’ कर रहे हैं और ‘बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (एसआईआर) वोट चोरी करने की कोशिश’ है।