खरी खरी संवाददाता
भोपाल, 3 जून। मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर रेस चल रही है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों में ही इस रेस के लिए कई फेस मैदान में हैं, लेकिन दोनों के हाईकमान को दमदार और सियासी समीकरणों में फिट होने वाले फेस की तलाश है। वर्तमान सदस्यों में बीजेपी के जार्ज कूरियन, सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह शामिल हैं।
राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा के खाते में दो और कांग्रेस के खाते में एक सीट जाना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर दोनों दलों में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। भाजपा खेमे में संगठन और सरकार से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं ने दावेदारी पेश की है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक करीब डेढ़ दर्जन नेताओं के नाम केंद्रीय नेतृत्व के पास पहुंचे हैं। पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार तय करना चाहती है। इस कारण अंतिम सूची को लेकर लगातार मंथन जारी है। भाजपा की ओर से संगठन और केंद्र सरकार से जुड़े कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पार्टी एक बार फिर किसी केंद्रीय चेहरे को मौका दे सकती है, वहीं प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और सामाजिक समीकरणों को साधने वाले चेहरों पर भी विचार किया जा रहा है।
कांग्रेस में भी राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए कई नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और उनके दोबारा चुनाव लड़ने को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में पार्टी नए चेहरे या किसी अनुभवी नेता पर दांव लगा सकती है। इस विषय पर दिल्ली में कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल चुका है। दिग्विजय सिंह के स्थान पर मंझे हुए सीनियर लीडर कमलनाथ को राज्यसभा भेजने की चर्चा गर्म है। कई बड़े नेताओं को हाईकमान ने दिल्ली बुलाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा राज्यसभा के जरिए उन नेताओं को अवसर दे सकती है जिन्हें संगठन या केंद्र में बड़ी जिम्मेदारियां दी जानी हैं। वहीं कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह ऐसा चेहरा चुने जो पार्टी को प्रदेश में राजनीतिक मजबूती भी दिला सके। कांग्रेस खेमे में सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि दिग्विजय सिंह के बाद पार्टी किसे राज्यसभा भेजेगी। दिग्विजय सिंह पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे दोबारा राज्यसभा की दौड़ में नहीं हैं। ऐसे में कई वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और संगठन से जुड़े नेताओं के नाम संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं।
फिलहाल सभी की नजरें भाजपा और कांग्रेस हाईकमान पर टिकी हैं। प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को 2028 के विधानसभा चुनाव की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।विधानसभा में भाजपा के मजबूत बहुमत के कारण पार्टी दो सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस अपनी एकमात्र सीट बचाने की चुनौती से जूझ रही है। कई बार यह भी चर्चा होती है कि बीजेपी तीसरी सीट पर भी प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को रोचक बना सकती है। इसलिए कांग्रेस में क्रास वोटिंग के खतरे को भांपकर भी काम किया जा रहा है। संख्या बल के आधार पर मुकाबला एकतरफा नजर आता है, लेकिन क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक रणनीतियों को लेकर दोनों दल सतर्क हैं। भाजपा तीसरी सीट पर भी नजर बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद में जुटी है।सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्यसभा की रेस में आखिर कौन होगा फेस? इसलिए दोनों ही दलों में भोपाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। रेस में फेस की तलाश बहुत जल्द पूरी हो जाएगी।
