मप्र विधानसभा में आदिवासियों के वनाधिकार पट्टों पर घमासान

खरी खरी संवाददाता

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में सोमवार को आदिवासियों के मुद्दे पर जमकर घमासान हुआ। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाकर सरकार पर तमाम आरोप लगाए।

ध्यान आकर्षण में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी जिलों में वन अधिकार के दावेदारों के प्रकरणों को खारिज किया जा रहा है। इस पर वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है कि आदिवासी जिलों में वन अधिकार के दावेदारों के प्रकरणों को खारिज कर बेदखल किया गया है। आदिवासियों के हित में सरकार लगातार काम कर रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि  सरकार आदिवासी जमीनों की सही से रखवाली नहीं कर रही है। सीएम ने सदन में प्रदेश के आदिवासी जिलों में वन अधिकार के दावेदार के प्रकरणों को खारिज कर बेदखल करने से उत्पन्न स्थिति पर ध्यानाकर्षण में कहा कि आदिवासियों को कई लाभ दिए गए हैं। हमारी सरकार  ठोस कदम उठा रही है। हम विपक्ष की सकारात्मक सलाह को लेने  के लिए तैयार हैं। आदिवासी पट्टों और आदिवासियों के विकास के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करेंगे। आदिवासी ग्राम में बरसात के समय आवास छीनना और आवास तोड़ना बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। अधिकारियों को इसके बारे में  निर्देश दिए गए हैं । ऐसा नहीं होना चाहिए।आदिवासियों के पट्टे के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन में कहा कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में ही सबसे अधिक 26,500 पट्टे बांटे गए हैं। जन जातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने सदन में ध्यान आकर्षण प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कहा कि सैटेलाइट इमेज के जरिए दिसंबर 2005 की स्थिति की जानकारी लेकर वन अधिकार पट्टों के मामले में निर्णय किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से 2005 की स्थिति में किसका कब्जा था यह भी साफ हो जाएगा। पट्टों को वितरण की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

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