पुल बोगदा के पास मेट्रो के रूट पर आजाद नगर में अब भी 18 दुकानदारों ने दुकानें खाली नहीं की हैं। इन्हें ही हटाने के लिए जिला प्रशासन की टीम बुधवार दोपहर आजाद नगर पहुंची। एसडीएम शहर आशुतोष शर्मा ने निरीक्षण के दौरान दुकानदारों को खुद ही दुकानें हटाने की समझाइश दी।
दुकानदारों ने तर्क दिया कि उन्हें दुकान के लिए उचित स्थान नहीं मिल रहा है। इस पर एसडीएम ने उन्हें खुद ही सामान शिफ्ट करने का 7 दिन का समय दिया है। नई सरकार ने अपने 100 दिन के लक्ष्य में इस रूट को क्लियर करने का लक्ष्य रखा था लेकिन दस महीने बाद भी सरकारी जमीन तक प्रशासन मुक्त नहीं करा पाया है। इस रूट पर अब भी आरा मशीन की 3.95 एकड़, भोपाल स्टेशन के पास 1.97 एकड़, नादरा बस स्टैंड पर 2.71 एकड़ और बड़ा बाग पर 3.95 एकड़ जमीन शामिल है। इसमें काफी जमीन सरकारी है।
मुश्किल… प्रायोरिटी कॉरिडोर रूट ही अब तक पूरा नहीं हो पाया
भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट
स्वीकृत लंबाई – 27.87 किमी एम्स से करोंद – 16.74 किमी एलीवेटेड – 13.35 किलोमीटर अंडरग्राउंड – 3.39 किलोमीटर एलीवेटेड स्टेशन – 14 अंडरग्राउंड स्टेशन – 2 भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा – 14.16 किमी.
एलीवेटेड स्टेशन – 14 कुल लागत 6941.40 करोड़ राज्य सरकार ने दी राशि 1288.38 करोड़ रुपए भारत सरकार से मिली राशि 738.62 करोड़ रुपए ईआईबी से
लोन: 815.22 करोड़ कुल मिली राशि: 2842.22 करोड़
एक नजर…पहली डेडलाइन 2022 थी, अब बढ़कर 2027 साल 2018 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अक्टूबर 2018 में भोपाल और इंदौर प्रोजेक्ट को केंद्र से मंजूरी मिली थी। तब कहा गया था कि इसे चार साल 2022 में पूरा कर लिया जाएगा। भोपाल में चार साल में करोंद से एम्स और भदभदा से रत्नागिरी के दोनों रूट पर मेट्रो शुरू होना था। भोपाल में अक्टूबर 2024 तक तो सुभाष नगर से आरकेएमपी तक 6.22 किमी का प्रायोरिटी कॉरिडोर रूट ही पूरा नहीं हो पाया। अब नई डेडलाइन 2027 रखी गई है। हालांकि काम की रफ्तार बेहद सुस्त है।
कलेक्टर बोले... लगातार एजेंसियों से बातचीत कर रहे, कुछ मामले कोर्ट में हैं हम लगातार मेट्रो रूट की अड़चनों को हटाने के लिए मेट्रो कंपनी और अन्य एजेंसियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। जहां जो अतिक्रमण हैं, उन्हें नियमानुसार हटाने की कार्रवाई चल रही है। कुछ प्रकरण न्यायालय में हैं। उनके लिए कोर्ट के निर्णय के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।-कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
