भोपाल में जल्द प्रदेश का पहला सीबीआरएन (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर) सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस सेंटर का उद्देश्य हिरोशिमा-नागासाकी जैसी परमाणु या रासायनिक हमलों से निपटने की तैयारी करना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए चुना है। 112 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह सेंटर अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित होगा। इसमें 50 बेड वाली चिकित्सा इकाई के साथ सीबीआरएन डिटेक्शन, डीकंटैमिनेशन, बायो-कंटेनमेंट जैसी सुविधाएं भी होंगी।
बीएमएचआरसी की डायरेक्टर डॉ. मनीषा श्रीवास्तव के अनुसार, इस सेंटर में खासतौर पर प्रशिक्षित स्टाफ नियुक्त किया जाएगा जो रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, और परमाणु हमलों के पीड़ितों का इलाज करेंगे। साथ ही रिसर्च और ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि भविष्य में इन आपदाओं से बेहतर ढंग से निपटा जा सके। जल्द इस सेंटर का निर्माण शुरू होगा और 2026 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है।
बीएमएचआरसी को गैस त्रासदी के अनुभव के कारण चुना गया
- भोपाल गैस त्रासदी के दर्दनाक अनुभव को देखते हुए बीएमएचआरसी को इस सेंटर के लिए चुना गया है। गैस त्रासदी झेल चुके इस शहर में अब भविष्य में होने वाली संभावित आपदाओं से निपटने के लिए यह सेंटर खास तैयारियों के साथ काम करेगा।
- इस सेंटर में अत्याधुनिक डिटेक्शन मॉनिटर लगाए जाएंगे, जो ये जानने में मदद करेंगे कि रोगी किस प्रकार के विकिरण या रासायनिक एजेंट से प्रभावित है। सेंटर में ऐसे सिस्टम होंगे जो शरीर की सतह पर मौजूद केमिकल एजेंट्स को भी पहचान सकेंगे।
