खरी खरी संवाददाता
भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप की बैठक सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित की गई। इस बैठक में मुक्यरूप से मध्यप्रदेश राज्यसभा के लिए खाली हुई एक सीट के लिए संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा हुई।बैठक में 4-5 नामों का पैनल बनाकर केंद्रीय नेतृत्व को भेजने पर सहमति बनी।
पार्टी ने अब तक उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, कई नामों पर विचार किया गया। तमिलनाडु भाजपा की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन का नाम भी चर्चा में है। राज्यसभा सीट के लिए मध्यप्रदेश भाजपा के कई नेताओं के नाम भी संभावित दावेदारों के रूप में सामने आए हैं। इनमें पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक आशीष अग्रवाल, पूर्व उपाध्यक्ष विनोद गोटिया, प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरुआ और पूर्व मंत्री रंजना बघेल शामिल हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से इन नामों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बैठक में राज्यसभा चुनाव के साथ आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों, केंद्र सरकार की योजनाओं और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर भी मंथन हुआ।
भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में राज्यसभा उपचुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया गया। तय किया गया कि 4-5 नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। मध्यप्रदेश से बाहर के किसी नेता को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। तमिलनाडु भाजपा की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन का नाम भी चर्चा में है। हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य रहे केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई है। मुरुगन अप्रैल 2024 में मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। इस्तीफे के बाद अब इस सीट पर उपचुनाव के जरिए नए सदस्य का चयन किया जाना है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बीच भाजपा में उम्मीदवार के चयन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।
राज्यसभा उपचुनाव में विधायकों की भूमिका अहम होगी। मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं, लेकिन दी गई जानकारी के मुताबिक कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। ऐसे में 229 विधायकों के आधार पर चुनावी गणित का आकलन किया जा रहा है। बीना विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वे खुद को कांग्रेस में बताती हैं, जबकि भाजपा के कार्यक्रमों में भी नजर आती रही हैं। ऐसे में उनकी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही दोनों दलों की प्रभावी संख्या का सटीक आकलन हो सकेगा।
बैठक में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत भोपाल, इंदौर और जबलपुर में बड़ी रैलियां आयोजित करने पर चर्चा हुई। इन कार्यक्रमों में एक लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा संगठन इन आयोजनों के जरिए अपनी राजनीतिक गतिविधियों को विस्तार देने की तैयारी में है।
कोर ग्रुप की बैठक में केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए मंत्रियों के नेतृत्व में विशेष टीमें बनाने पर भी चर्चा हुई। केंद्र के प्रत्येक मंत्रालय से एक सांसद को जोड़ने की व्यवस्था पर विचार किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार के तीन साल की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई। मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के कामकाज को सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी मंथन हुआ।
