खरी खरी संवाददाता
भोपाल 8 जून। मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने आखिरी समय में बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए महेश केवट को तीसरे प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार दिया है। भाजपा के इस फैसले ने चुनाव को सीधी राजनीतिक लड़ाई में बदल दिया है, क्योंकि अब तीसरी सीट पर मुकाबला कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन और महेश केवट के बीच होगा।
महेश केवट वर्तमान में मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। भाजपा नेतृत्व उन्हें संगठन के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। नामांकन के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनकी जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देती रही है, उन्होंने उसे पूरी प्रतिबद्धता से निभाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा का यह कदम केवल एक अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने तक सीमित नहीं है। केवट को मैदान में उतारकर पार्टी ने प्रदेश के केवट, निषाद और मछुआरा समुदाय को स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। इसके साथ ही भाजपा ने सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठननिष्ठ कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का संकेत भी दिया है।
हालांकि संख्या बल के हिसाब से भाजपा तीसरी सीट पर आसान स्थिति में नहीं मानी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी को जीत के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती है और इसी वजह से भाजपा ने विशेष रणनीति तैयार की है। दूसरी ओर कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की आशंका सता रही है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है। राजनीतिक तौर पर यह चुनाव केवल राज्यसभा की एक सीट का नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले सामाजिक समीकरणों और विधायकों की एकजुटता की भी परीक्षा माना जा रहा है। यदि महेश केवट जीत दर्ज करते हैं तो इसे भाजपा की बड़ी रणनीतिक सफलता माना जाएगा, जबकि कांग्रेस के लिए तीसरी सीट बचाना प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
