खरी खरी संवाददाता
पटना। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उप-चुनाव में बीजेपी की हार ने बिहार की सियासत में नई इबारत लिख दी है। देश के जाने माने इलेक्शन स्ट्रैटिजिस्ट और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर इस सीट से विजयी हुए हैं। वे पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं।उनका जीतना बिहार की राजनीति में बड़े उलटफेर का संकेत माना जा रहा है।
यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्य सभा के लिए चुने जाने के बाद खाली हुई थी। पटना के शहरी क्षेत्र में आने वाली यह सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है लेकिन इस बार के नतीजों ने बड़े उलटफेर का संकेत दिया है। प्रशांत किशोऱ ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के नीरज कुमार को 19,324 वोट से हरा दिया। उन्हें 64,151 वोट (49।2%) मिले जबकि नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले हैं। नौ महीने पहले ही बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 243 सीटों में 202 पर जीत दर्ज की थी। बांकीपुर को बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीट समझा जाता रहा है। जबकि उन चुनावों में जनसुराज पार्टी का एक भी उम्मीदवार नहीं जीत सका था।
कई विश्लेषक बहुत कम वोटर टर्नआउट को भी इसकी वजह मान रहे हैं, हालांकि बीजेपी ने हार के पीछे राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के वोटों का प्रशांत किशोर को ट्रांसफ़र होने को एक बड़ी वजह बताया है। बीजेपी का कहना है कि बांकीपुर के उप चुनाव में आरजेडी का जनाधार अधिक खिसका है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, “2025 विधानसभा चुनाव में 41।1% मतदान हुआ था जिसमें बीजेपी को 63।25% और राजद को 29।83% वोट मिले थे।” “लेकिन इस उपचुनाव में मतदान 8% प्रतिशत कम होकर 33।3% रह गया। इसमें बीजेपी को 34।4% वोट मिले, राजद को 10।95%, जबकि जन सुराज को 49।23% वोट मिले।” उन्होंने लिखा, “2025 की तुलना में बीजेपी अपने 54% से अधिक वोट शेयर को बचाने में सफल रही, जबकि आरजेडी अपने पुराने वोट शेयर का सिर्फ़ 37% ही बचा पाई। बीजेपी के वोट शेयर में 45।6% की गिरावट आई, जबकि राजद के वोट शेयर में 63।3% की भारी गिरावट दर्ज हुई। यानी, आरजेडी का जनाधार बीजेपी की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से खिसका।”उन्होंने दावा किया कि ‘आरजेडी का एक बड़ा पारंपरिक वोट बैंक जन सुराज की ओर स्थानांतरित हुआ। तेजस्वी यादव की चुनावी अभियान से दूरी ने भी इसमें भूमिका निभाई।’अमित मालवीय ने स्वीकार किया कि ‘कम मतदान की वजह ये रही कि बीजेपी समर्थक मतदान केंद्र तक नहीं पहुँचे।’अमित मालवीय ने बांकीपुर के नतीजे को आरजेडी के चेतावनी बताया है।
उन्होंने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में लिखा, “बांकीपुर में जो हुआ, वह आरजेडी के लिए चेतावनी है। बीजेपी को हराने के प्रयास में अगर उसके वोट जन सुराज पार्टी की ओर स्थानांतरित हुए हैं, तो इतिहास बताता है कि ऐसी रणनीति अक्सर मुख्य प्रतिद्वंद्वी से अधिक उस दल को ही कमजोर कर देती है, जो अपनी राजनीतिक ज़मीन छोड़ता है।” अमित मालवीय ने कांग्रेस का उदाहरण देते हुए लिखा, “पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने वामपंथ को हराने के लिए 2011 में तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक जगह छोड़ी। नतीजा यह हुआ कि तृणमूल मज़बूत होती गई और कांग्रेस हाशिये पर चली गई। दिल्ली में भी कांग्रेस ने वही गलती दोहराई। भाजपा को रोकने के नाम पर उसने आम आदमी पार्टी के लिए जगह बनाई और अंततः उसका वोट शेयर लगभग 2% तक सिमट गया।” उधर, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बांकीपुर की जीत को ‘बीजेपी के विरोध और लोकतंत्र में जनता के विश्वास की जीत’ बताया है। उन्होंने विजेता को बधाई दी और उनके जन समर्पित कार्यकाल और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, “बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे से ये फिर से साबित हो गया कि ” जीत उसकी ज़रूर होती है , जो लगातार लड़ता है , जनता से जिसका निरंतर जुड़ाव होता है, जो कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का सम्मान करता है और उनके साथ संपर्क और संवाद कायम रखता है।”
हालांकि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में ‘अपर कास्ट’ की ख़ासी मौजूदगी है और यहां से बीजेपी के नितिन नबीन पांच बार से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। ऐसे में यहां से हार बीजेपी के लिए भी एक ख़तरे की घंटी है।, “राजनीतिक दलों के पास उपलब्ध जाति और समुदाय आधारित अनुमानों के मुताबिक़, बांकीपुर में कायस्थ 14%, भूमिहार 8%, ब्राह्मण 8%, राजपूत 7%, कुर्मी 5%, कुशवाहा 3%, मुस्लिम 12%, कहार 9% (अत्यंत पिछड़ा वर्ग), बनिया 9% और अनुसूचित जाति 9% हैं।” “हालांकि ये केवल स्थानीय राजनीतिक दलों के अनुमान हैं, फिर भी वे यह संकेत देते हैं कि बांकीपुर में कथित ‘सवर्ण’ आबादी का अनुपात लगभग 37% तक हो सकता है। इसमें बनिया समुदाय को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि बिहार में उन्हें ओबीसी का दर्जा है।” यही गणित बीजेपी की लगातार जीत की बड़ी वजह रहा है। उधर, आरजेडी ने बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत को बीजेपी की जीत बताया। जब नतीजे आ रहे थे आरजेडी सांसद मीसा भारती ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “”कहा जाए तो ये बीजेपी प्रत्याशी की हार है लेकिन प्रशांत किशोर अगर वहां जीत रहे हैं तो ये बीजेपी की ही जीत है। वहां पर प्रत्याशी बदले गए, क्या कारण रहा कि प्रत्याशी बदले गए?।।। जनता को प्रशांत किशोर ने बहुत सारे वादे किए हैं जो कि असंभव है। किसी भी पार्टी के सांसद हों, विधायक हों, उसके लिए ये सब कर पाना बहुत मुश्किल है।” “ये जगह बीजेपी का गढ़ है, जहां पिछले 35-40 सालों से कोई काम नहीं हुआ है उसमें वे कह रहे हैं कि बच्चों को पटना के प्राइवेट स्कूल में भर्ती करवा देंगे, सरकारी स्कूलों में जाने की ज़रूरत नहीं है।।। जनता को सच्चाई पता नहीं है कि प्रशांत किशोर ही बीजेपी के असली प्रत्याशी हैं। जनता को ये बात समझने में समय लगेगा लेकिन जीतने के बाद ये देखने को मिलेगा।”
बांकीपुर में अपनी जीत के लिए प्रशांत किशोर ने दो प्रमुख कारण गिनाए हैं- पहला, बीजेपी, कांग्रेस और आरजेडी के असंतुष्ट समर्थकों का समर्थन, और दूसरा जेन ज़ी के विरोध प्रदर्शनों का असर। नाव नतीजे आने के बाद प्रशांत किशोर ने सबसे प्रमुख जो बात कही वो ये कि ‘यह चुनाव बीजेपी के लिए एक संदेश’ है।उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह चुनाव सिर्फ़ विधायक बनाने का नहीं था, बल्कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को यह संदेश देने का था कि बिहार में एक अच्छा व्यक्ति मुख्यमंत्री बनाया जाए, ताकि राज्य में शिक्षा और रोज़गार की स्थिति बेहतर हो सके। लोगों ने यही संदेश दिया है… सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार को अच्छा नेतृत्व मिलना चाहिए। यहां से होने वाला पलायन रुकना चाहिए।”
