नई दिल्ली: रियल एस्टेट से जुड़े लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स की गणना में इंडेक्सेशन बेनेफिट को हटाने पर उठे सवालों पर सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) के चेयरमैन रवि अग्रवाल का कहना है कि नया सिस्टम अधिकतर मामलों में फायदेमंद है। इस पीछे असल मंशा टैक्स स्ट्रक्चर को सिंपल करने की थी। कॉस्ट ऑफ इंडेक्स वगैरह की कैलकुलेशन कई बार कॉम्प्लेक्स हो जाती है। अब इंडेक्शन हटने से प्रोसेस सिंपल हो गया है। अग्रवाल से खास बातचीत के मुख्य अंश:

इंडेक्सेशन बेनेफिट हटाने का विरोध हो रहा है। इनकम टैक्स विभाग ने कहा है कि पिछले 10 वर्षों में प्रॉपर्टी का दाम अगर ढाई गुना या इससे अधिक बढ़ा हो तो नया सिस्टम फायदेमंद है, लेकिन कहा जा रहा है कि कई जगहों पर प्राइस इतनी नहीं बढ़ी है और वहां सेलर को नुकसान होगा। आपका क्या कहना है?
पिछले सालों में प्रॉपटी रेट्स जिस तरह बढ़े हैं, उस हिसाब से अधिकतर मामलों में नया सिस्टम फायदेमंद है। अगर कहीं पर प्राइस कम बढ़ी हो, तो इसकी वजह लोकेशन और प्रॉपर्टी की कंडिशन भी हो सकती है। हालांकि लॉन्ग टर्म में देखें तो ऐसे मामले बेहद कम होंगे। इंडेक्सेशन बेनेफिट हटाया गया है, तो इसके साथ LTCG टैक्स रेट भी 20% से घटाकर 12.5% किया गया है। इससे टैक्स देनदारी अधिकतर मामलों में पहले जितनी नहीं आएगी।