खरी खरी संवाददाता

कोलकता, 24 मई। पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर दुबारा हुए मतदान के बाद हुई मतगणना में भारतीय जनता पार्टी के देबांग्शु पांडा एक लाख से ज़्यादा वोटों से जीत गए हैं। उन्होंने 149666 यानी कि 71।2% वोट हासिल किएदूसरे नंबर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के शंभु नाथ कुर्मी रहे, जिन्हें 40645 (19।34%) वोट मिले। कांग्रेस यहां तीसरे नंबर पर रही जिसके प्रत्याशी अब्दुर रज़्ज़ाक को 10084 (4।8%) वोट मिले। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर ख़ान के नाम पर भी 7783 (3।7%) वोट मिले हैं, हालांकि मतदान से पहले उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का एलान किया था। यहां 21 मई को फिर से मतदान कराया गया था और रविवार को इस सीट पर मतगणना हुई।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हुए थे और चार मई को परिणाम आए थे। इन चुनावों में बीजेपी ने 207 सीटें और टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं। दूसरे चरण के मतदान के दौरान फाल्टा सीट पर भी मतदान हुआ था। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर अनियमितताएं पाईं और उसके बाद 21 मई को दोबारा मतदान की घोषणा की थी। फाल्टा विधानसभा पहले से चर्चाओं में रहा था। बीजेपी का आरोप था कि स्थानीय टीएमसी नेता जहांगीर ख़ान लोगों का उत्पीड़न करते हैं। तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी को इस सीट पर चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। चुनाव प्रक्रिया के दौरान यहां ऑब्ज़र्वर बनाए गए यूपी के चर्चित आईपीएस अजयपाल शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें अजयपाल शर्मा ने जहांगीर को चेतावनी दी थी। वीडियो में वह कहते दिखे, “अच्छी तरह से समझ लें, किसी ने बदमाशी की तो कायदे से इलाज किया जाएगा। कहीं से ख़बर आई कि किसी ने कोई ख़ुराफ़ात की, किसी को परेशान करने की कोशिश की तो उसकी अच्छी से ख़बर ली जाएगी। जहांगीर के घरवाले भी ये सुन लें। उसे बता देना। बार-बार ख़बरें आ रही हैं कि धमकाया जा रहा है। उसे बता देना, बाद में रोना-पछताना मत।” इस वीडियो के वायरल होने के बाद अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने आईपीएस अजयपाल शर्मा की निंदा की थी और हटाए जाने की मांग की थी।

माना जा रहा था कि फाल्टा सीट पर टीएमसी के जहांगीर ख़ान का मुकाबला बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज़्ज़ाक मोल्ला से है। सीपीआई (एम) के संभू नाथ कुर्मी को भी चुनावी मैदान में गिना जा रहा था। जहाँगीर ख़ान के ख़िलाफ़ मतदाताओं को कथित धमकी और चुनावी अनियमितताओं के मामले में पांच, 10 और 15 मई को कुल पांच एफ़आईआर दर्ज़ हुई थीं।हालांकि 18 मई को कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने फाल्टा में फिर से मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक जहांगीर ख़ान की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी।लेकिन एक दिन बाद ही जहांगीर ख़ान ने अचानक चुनावी रेस से बाहर होने की घोषणा कर दी। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत फ़ैसला है न कि पार्टी का।

इस मामले पर जहाँगीर ख़ान ने कहा, “मैं फाल्टा की मिट्टी का बेटा हूँ। मैं हमेशा फाल्टा में शांति और विकास चाहता हूँ। मेरा सपना फाल्टा को सुंदर बनाना था। मुख्यमंत्री फाल्टा के लिए एक विशेष पैकेज देंगे और इसी वजह से मैं 21 मई को होने वाले मतदान से ख़ुद को अलग कर रहा हूँ।” उनकी इस घोषणा पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ‘जहांगीर ख़ान भाग गए क्योंकि उन्हें कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिला।’तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को एक्स पर एक लंबी पोस्ट करके कहा, “फाल्टा विधानसभा सीट के दोबारा मतदान की मतगणना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज दोपहर 3:30 बजे तक सभी 21 राउंड की गिनती पूरी हो गई, जबकि 4 मई को इसी समय तक सिर्फ़ 2 से 4 राउंड की गिनती हुई थी। देश चुनाव आयोग से इसका जवाब चाहता है।” उन्होंने दावा किया, “पिछले 10 दिनों में फाल्टा के 1000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन चुनाव आयोग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। आचार संहिता लागू होने के बावजूद दिनदहाड़े पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई।” उन्होंने चुनाव आयोग पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है।