खरी खरी संवाददाता

भोपाल। मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र के वोटरों ने बता दिया कि चुनाव में अब सियासी दलों की मनमर्जी नहीं चलेगी। इस सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र के बड़े और राज्य के पावरफुल लीडर नरोत्तम मिश्रा का टिकटकर काट कर संघ से सियासत में आए आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बना दिया। नाराज वोटरों ने पूरी सरकार और भाजपा संगठन के दतिया में डेरा डालने के बाद भी बीजेपी को पटखनी दे दी। नाराजगी इस कदर थी कि दतिया के विकास को माइल स्टोन बना देने वाले डा नरोत्तम मिश्रा के बूथ तक पर बीजेपी 27 वोटों से हार गई। माना जा रहा है कि भाजपा प्रत्याशी की नामांकन सभा में नरोत्तम मिश्रा की आंखों से टपके आंसुओं का दतिया को वोटरों ने बदला ले लिया।

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया हैं। कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को छह हजार से ज्यादा मतों से हराया। इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा भूमिका पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की रही। नरोत्तम मिश्रा दतिया से चुनाव लड़ना चाह रहे थे, उन्होंने नामांकन पत्र भी ले लिया था, लेकिन पार्टी की तरफ से ऐनवक्त पर आशुतोष तिवारी को टिकट दे दिया गया। अब उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद मीडिया से बातचीत में नरोत्तम मिश्रा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि  उन्होंने कभी राज्यसभा या लोकसभा जाने की इच्छा नहीं जताई। उन्होंने सिर्फ विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने किसी अन्य उम्मीदवार को मौका दिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना में कांग्रेस लगातार मजबूत बढ़त बनाए हुए थी। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र की रही, जिस बूथ को भाजपा का मजबूत माना जाता था, वहां भी कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से अधिक वोट मिले। बूथ क्रमांक 121 पर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 291 वोट, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 264 वोट मिले। इस तरह कांग्रेस ने इस बूथ पर 27 वोटों की बढ़त दर्ज की। राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ एक बूथ का परिणाम नहीं, बल्कि बदलते स्थानीय राजनीतिक माहौल का संकेत मान रहे हैं। डॉ. नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनके बूथ पर भी भाजपा का पीछे रहना पार्टी के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है। यह माना जा रहा है कि वोटर अगर आपकी विचारधारा का है तो भी उस पर प्रत्याशी थोपा नहीं जा सकता है।