तमिलनाडू में एआईडीएमके और बीजेपी के बीच फिर हुई दोस्ती

खरी खरी संवाददाता

चेन्नै। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले तमिलनाडु में बीजेपी और एआईएडीएमके की फिर दोस्ती हो गई है। चेन्नै पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस गठबंधन की घोषणा करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव एऩडीए के बैनर तले लड़ा जाएगा। गठबंधन की अगुवाई अद्रमुक के मुखिया पलानीस्वामी करेंगे।

भाजपा और अद्रमुक की इस दोस्ती का विधानसभा में क्या फायदा होगा यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए को तात्कालिक लाभ मिला है। इस गठबंधन से राज्यसभा में एनडीए का कुनबा बढ़ गया है। लोकसभा में इस बार एआईडीएमके का कोई सदस्य नहीं है, लेकिन राज्यसभा में उसके सदस्य हैं। अब AIADMK के समर्थन और कुछ निर्दलीयों के साथ NDA को कुल 129 सांसदों का संख्याबल मिल गया है। यानी अब मोदी सरकार के पास न सिर्फ लोकसभा में बल्कि राज्यसभा में भी मजबूत पकड़ है। यह वही सदन है जहां कई बार सरकार के कानून अटक जाते थे, अब ऐसा होना मुश्किल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर इसे तमिलनाडु के लिए ‘प्रगति की दिशा में एकजुटता’ बताया, लेकिन ये भी कहा कि इस गठबंधन का असली मकसद डीएमके को हराना है। यानी लक्ष्य सिर्फ राज्य की सत्ता नहीं, बल्कि तमिल राजनीति में बीजेपी की साख भी बनाना है। मोदी और शाह दोनों ने AIADMK को एमजीआर और जयललिता की विरासत बताकर दक्षिण में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश की है। अमित शाह ने साफ किया कि चुनाव दो स्तरों पर लड़ा जाएगा। दिल्ली से मोदी और राज्य में पलानीस्वामी के नेतृत्व में। उनका यह बयान भी रणनीति का हिस्सा है, ताकि स्थानीय मतदाताओं को अपने नेता का चेहरा दिखे और राष्ट्रीय समर्थकों को मोदी का। बीजेपी और AIADMK का रिश्ता नया नहीं है, लेकिन हालिया सालों में तनाव बढ़ा था। ऐसे में अचानक से हुई ये वापसी बताती है कि पर्दे के पीछे की बातचीत कई हफ्तों से चल रही थी। तमिलनाडु में डीएमके मजबूत है, लेकिन अब मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इससे दिल्ली में बैठे भाजपा के रणनीतिकारों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है,  राज्यसभा में पहली बार बहुमत की ताकत जो उनके पास है।

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