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नई दिल्ली, 17 मई। भारत सरकार ने चांदी की आयात नीति में संशोधन कर दिया है। अब लाइसेंस लेना जरूरी होगा। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाले डायरेक्टरेट ऑफ़ फ़ॉरेन ट्रेड ने इसकी घोषणा की है।इस संशोधन के बाद चांदी के आयात को भारत में ‘फ़्री’ से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया गया है। यानी पहले चांदी आयात करने के लिए केवल ड्यूटी (शुल्क) देनी होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा।
चांदी की इम्पोर्ट पॉलिसी में बदलाव के बाद अब चांदी आयात करने के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ फ़ॉरेन ट्रेड के पास इसके लाइसेंस के लिए आवेदन देना होगा और लाइसेंस मिलने के बाद ही चांदी के आयात की अनुमति दी जाएगी।
ख़ास बात यह है कि ऐसी कोई शर्त सोने के साथ नहीं रखी गई है, जो कि चांदी के मुक़ाबले काफ़ी महंगा है। हम जानने की कोशिश करेंगे कि ऐसा क्यों किया गया है और इसके पीछे क्या मक़सद हो सकता है। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद 12 मई को सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी गई थी। इसका मक़सद स्पष्ट था कि सोना और चांदी महंगे होने से इसकी ख़रीदारी कम होगी, जिससे भारत को इसके आयात के लिए कम विदेशी मुद्रा ख़र्च करनी होगी। डायरेक्टरेट ऑफ़ फ़ॉरेन ट्रेड ने 16 मई को चांदी के आयात को लेकर अपना नया आदेश जारी किया है। यानी सोने-चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के महज़ चार दिन के बाद यह फ़ैसला लिया गया।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के निदेशक अजय श्रीवास्तव कहते हैं, “अब तक आप इम्पोर्ट ड्यूटी देकर जितनी चाहे चांदी इम्पोर्ट कर सकते थे। लेकिन अब डीजीएफ़टी तय करेगा कि आपको चांदी के इम्पोर्ट का लाइसेंस देना है या नहीं।” वह कहते हैं, “दरअसल भारत और यूएई के बीच साल 2022 में एक समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत को यूएई से आयात होने वाली चांदी पर हर साल इम्पोर्ट ड्यूटी 1% कम करनी थी। इस तरह से फ़िलहाल भारत को यूएई से चांदी आयात करने पर केवल 7% आयात शुल्क देना पड़ता था। जबकि अगर आप ब्रिटेन से चांदी आयात करते हैं तो आपको 15% आयात शुल्क देना होता था।” “यह एक बहुत बड़ा अंतर था। हालाँकि सरकार ने इस फ़ैसले के पीछे की वजह नहीं बताई है। लेकिन अगर इसका मक़सद विदेशी मुद्रा बचाना होता तो चांदी से कई गुना महंगे सोने के लिए ऐसा फ़ैसला किया जाता।” अजय श्रीवास्तव भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशालय में ‘एडिशनल डायरेक्टर जनरल फ़ॉरेन ट्रेड’ के पद पर रह चुके हैं।उनका मानना है, “यूएई से सोने के आयात पर अन्य देशों के मुक़ाबले केवल 1% की छूट है, यानी यह 14% है, जो बहुत बड़ा अंतर नहीं है। लेकिन चांदी के मामले में हो सकता है कि सरकार को आशंका हो कि उसकी पॉलिसी का फ़ायदा उठाकर कोई भी कारोबारी यूएई के ज़रिए भारत तक चांदी ले आएगा। फ़िलहाल तो यही नज़र आ रहा है।” ज़ाहिर तौर पर इसका एक असर जो नज़र आता है, वह यह हो सकता है कि चांदी की क़ीमतों में बढ़ोतरी दिखे।
