नई दिल्ली: फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग यानी वायदा और विकल्प ट्रेडिंग को लेकर सेबी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निवेशकों को सचेत किया था। लेकिन इसे बावजूद खुदरा निवेशकों की इसमें रुचि बढ़ रही है। लिहाजा, इससे जुड़े खतरों से निपटने के लिए सेबी डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नियमों में कई बदलावों पर विचार किया जा रहा है। डेरिवेटिव एक फॉर्मल फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट है जो निवेशक को भविष्य की तिथि के लिए एसेट खरीदने और बेचने की अनुमति देता है। डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति तिथि पहले से निर्धारित की जाती है। खुदरा निवेशकों के दम पर इंडेक्स और स्टॉक ऑप्शंस की ट्रेडिंग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इसे देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने कहा था कि एफएंडओ में रिटेल ट्रेडिंग में उछाल से आगे कई चुनौतियां आ सकती हैं जो मार्केट के साथ ही निवेशकों के सेटिमेंट और परिवारों के फाइनेंस को लेकर भी हो सकती है।

 
अब सेबी नए नियमों पर विचार कर रहा है, जिससे खतरे कम रहें। सूत्रों के मुताबिक, सेबी इंडेक्स और स्टॉफ ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर खुलासे के लिए भी कह सकता है, जबकि अभी सिर्फ ऑप्शंस एक्टिविटी और ओपन इंट्रेस्ट पर खुलासा होता है। सेबी एक्सचेंजों को टर्नओवर पर चार्ज लगाने की बजाए फ्लैट फीस लेने के लिए भी कह सकता है।