तेल अवीव/यरुशलम: पाकिस्‍तान के साथ कारगिल युद्ध के आज 25 साल पूरे हो गए हैं और पूरा देश विजय दिवस मना रहा है। भारत की इस जीत में दोस्‍त इजरायल ने बड़ी अहम भूमिका निभाई थी। भारतीय सेना को साल 1999 में कारगिल की चोटियों पर बैठे पाकिस्‍तानी सैनिकों को निशाना बनाने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। भारत के पास एक बोफोर्स तोप थी जो चोटियों पर निशाना बना रही थी लेकिन दुश्‍मन के बंकर पर सटीक हमला करने में मुश्किल आ रही थी। महासंकट की इस घड़ी में दोस्‍त इजरायल भारत के साथ आया और लेजर गाइडेड बमों के लिए लाइटनिंग पॉड की तत्‍काल भारत को आपूर्ति कर दी। इन पॉड को इजरायली इंजीनियरों की मदद से भारत के मिराज 2000 फाइटर जेट में लगाया गया। इसके बाद भाारतीय वायुसेना के शेरों ने पाकिस्‍तानी सैनिकों के ठिकानों को चुन-चुनकर तबाह करना शुरू कर दिया। आइए जानते हैं इस दोस्‍ती की पूरी कहानी….

इजरायल ने जिन हथियारों को दिया था, उनमें एक प्रमुख उपकरण था इजरायल का लाइटेनिंग लेजर डेजिग्‍नेटर पॉड। यह पॉड टारगेट पर अदृश्‍य बीम को फायर करता था जिससे इजरायली बम उसे ट्रैक करता था और फिर सटीक तरीके से तबाह कर देता था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर रघुनाथ नामबियार ने 24 जून 1999 को लाइटनिंग पॉड से लैस मिराज विमान की मदद से कारगिल की चर्चित टाइगर हिल पर पाक‍िस्‍तानी सेना के ठिकाने पर निशाना लगाया। इस हमले में पाकिस्‍तानी सेना का यह ठिकाना तबाह हो गया। यह युद्ध में भारतीय वायुसेना का लेजर गाइडेड बम से पहला सफल हमला था। भारतीय वायुसेना ने कुछ साल पहले इसका वीडियो भी जारी किया था।